वाच्य: परिभाषा व भेद और परिवर्तन - All Study Notes
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31 May 2021

वाच्य: परिभाषा व भेद और परिवर्तन

वाच्य क्रिया का वह रूप है, जिससे यह ज्ञात होता है कि वाक्य में कर्ता प्रधान है या कर्म अथवा भाव।

क्रिया के लिंग एवं वचन उसी के अनुरूप होते हैं।

वाच्य


खंड (अ) , खंड (ब)

  • (क) राम विद्यालय जाता है। (क) राम द्वारा विद्यालय जाया जाता है।
  • (ख) गरिमा पत्र लिखती है। (ख) गरिमा द्वारा पत्र लिखा जाता है।
  • (ग) वह जोर से हँसता है। (ग) उससे जोर से हँसा जाता है।
  • (घ) चलो, चलें। (घ) चलो, चला जाए।

खंड (अ) के सभी वाक्यों में कर्ता प्रमुख है और क्रिया के लिंग एवं वचन उसी कर्ता के अनुसार हैं।

खंड (ब) के (क) और (ख) वाक्यों में कर्म प्रमुख है और क्रिया के लिंग एवं वचन उसी कर्म के अनुसार हैं।

जबकि वाक्य (ग) और (घ) में भावों की प्रधानता है।

अत: किसी वाक्य में कर्ता, क्रिया या भावों के अनुसार क्रिया का लिंग, वचन, एवं पुरुष होना ही वाच्य कहलाता है.

वाच्य के भेद

  1. कर्तृवाच्य
  2. कर्मवाच्य तथा
  3. भाववाच्य

(1) कर्तृवाच्य

र्तृवाच्य का मुख्य बिंदु कर्ता होता है। क्रिया के लिंग तथा वचन कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार ही होते हैं।

  • (क) माली पौधों को सींच रहा है।
  • (ख) मजदूर इमारत बना रहे हैं।

इन वाक्यों में क्रियाएँ कर्ता के अनुसार हैं। वाक्य (क) में ‘माली” (कर्ता) एकवचन पुंलिंग है। वाक्य (ख) में ‘मजदूर’ (कर्ता) बहुवचन पुंलिंग है। दोनो वाक्यों में क्रिया भी कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार है।

कर्तवाच्य में अकर्मक एवं सकर्मक दोनों प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग होता है; जैसे-

  • (क) मोहन पुस्तक पढ़ता है। (सकर्मक)
  • (ख) कमला हँस रही है। (अकर्मक)

(2) कर्मवाच्य

  • (क) मोहिनी द्वारा पौधों को सींचा जा रहा है।
  • (ख) मजदूरों द्वारा इमारत बनाई जा रही है।

उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाओं के लिंग एवं वचन कर्ता के अनुसार न होकर कर्म के अनुसार हैं।

(क) वाक्य में पौधे (ख) वाक्य में इमारत कर्म के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। अत: कर्मवाच्य का मुख्य बिंदु कर्म होता है। क्रिया के लिंग एवं वचन कर्म के लिंग एवं वचन के अनुसार होते हैं।

क्रिया का कर्ता अज्ञात होने पर- (क) मोहन को बुलाया गया होगा। (ख) बात कही गई।

सुझाव देने के लिए – (क)सबूत इकट्ठे किए जाएँ। (ख) चोर का पता लगाया जाए।

कानूनी भाषा का प्रयोग करते हुए – (क) गवाह को पेश किया जाए। (ख) आपको सूचित किया जाता है कि

किसी कार्य को करने में असमर्थता दिखाने के लिए – (क) मुझसे चला नहीं जाता। (ख) उससे देखा नहीं जाता।

अचानक किसी क्रिया के घटित होने पर – (क) उसका दिल टूट गया। (ख) यह क्या हो गया।

(3) भाववाच्य

  • (क) मुझसे चला नहीं जाता। (ख) अब चला जाए।

उपर्युक्त वाक्यों में भावों की प्रधानता है; अकर्मक क्रिया का प्रयोग किया गया है जो अन्य पुरुष एकवचन, पुंलिंग है। अत: भाववाच्य में भावों की प्रधानता होने के कारण अकर्मक क्रियाओं का प्रयोग होता है, जो सदैव अन्य पुरुष, एकवचन एवं पुंलिंग होती है। भाववाच्य का प्रयोग कभी-कभी कर्ता के बिना भी किया जाता है; जैसे (क) गर्मी के मारे सोया नहीं जाता। (ख) अब चला जाए।

वाच्य परिवर्तन

1. कतृवाच्य से कर्मवाच्य में :

  1. कर्ता के बाद- ‘से’, ‘के द्वारा’ अथवा ‘द्वारा’ जोड़ना चाहिए।
  2. क्रियापद में ‘या’ प्रत्यय जोड़कर ‘जा’ धातु को कर्म के लिंग तथा वचन के अनुसार प्रयोग करना चाहिए।
  3. कर्म के साथ लगी विभक्ति (कारक-चिह्न) हटा देनी चाहिए।

कतृवाच्य कर्मवाच्य

  1. अमन चिट्ठी पढ़ता है। अमन द्वारा चिट्ठी पढ़ी जाती है।
  2. राम फूल तोड़ता है। राम द्वारा फूल तोड़े जाते हैं।
  3. मैंने पत्र लिखा। मेरे द्वारा पत्र लिखा गया।
  4. सिपाही ने चोर को पकड़ा। सिपाही द्वारा चोर पकडा गया।

 2. कतृवाच्य से भाववाच्य में :

  1. भाववाच्य केवल अकर्मक क्रियाओं द्वारा बनाए जाते हैं।
  2. कर्ता के बाद ‘से’, ‘द्वारा’, ‘के द्वारा’ परसर्ग (कारक-चिह्न) जोड़े जाते हैं।
  3. ‘जा’ धातु के क्रिया के रूपों को क्रिया के काल के अनुसार जोड़ा जाता है।

कतृवाच्य भाववाच्या

  1. मैं नहीं सोता। मुझसे सोया नहीं जाता।
  2. राजू तेज दौड़ता है। राजू से तेज दौड़ा जाता है।
  3. मैं बैठ नहीं सकता। मुझसे बैठा नहीं जाता।
  4. भगवान रक्षा करता है। भगवान द्वारा रक्षा की जाती है।

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